Monday, May 29, 2017

Will Capt Amarinder dare to throw his corrupt minister?


Punjab Congress seems to be back with the old ways; saving the corrupt ones and ignoring the ground realities. 
Punjab cabinet minister and senior most Congress leader Rana Gurjit Singh has brought a bad name by doing something silly and really unthinkable. 
Rana’s cook and other employees getting mining tenders worth Rs 50 crores has attracted opprobrium from all sides. 

Rana might have to face an enquiry, he might have to undergo severe questioning or worst, he might have to quit. 
The volley of criticism has come too early in the day when Capt was still enjoying the fruits of the honeymoon period. 
The reality struck Capt hard when he decided to handover enquiry to a judicial commission.
It was expected at the time of Capt Amarinder taking an oath that he will turn around the state and bring much-needed development in the state.
The allegation of corruption will dog Capt Amarinder Singh as his senior most minister finds himself in a soup.
It will certainly dent the image of Captain Amarinder Singh, who was trying hard to project himself as a leader, destined to change the face of Punjab. 
Akalis and AAP have sensed the blood and planning to up the ante against Congress government.

Saturday, May 20, 2017

जीएसटी कोई जिन्न नहीं, जो सारी मुश्किलें ख़त्म कर दें...


देश एक है तो अब कर भी एक ही चुकाना होगा. एकल टैक्स लगाने की मांग सालों से चल रही थी. एनडीए सरकार ने अपने तीसरे वर्षगाँठ पर जीएसटी के ज़रिये अर्थव्यवस्था में ऊष्मा भरने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. जीएसटी कौंसिल ने 1200 से ज्यादा वस्तुओं और सेवाओं के लिए टैक्स के चार स्लैब तय किए हैं. संघीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण घटना विकास भी है.
अरुण जेटली वकील हैं और देश के वित्त मंत्री भी हैं, इसलिए वह उलझन भरे आंकड़ों को भी सरल करके दिखाने और समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या लोग जीएसटी के आने बाद वित्त मंत्री से रहम की उम्मीद करें. देश की जनता फिलहाल आंकड़ों से जूझ रही है.  

भारत में टैक्स चोरी रोकने की दिशा में अब तक जितने भी प्रयास किए गए, वह नाकाफी साबित हुए हैं, अब आगे क्या होगा? क्या इस नई टैक्स व्यवस्था के आने से इकॉनमी लीक पर आ जाएगी?
हमारे देश में इंस्पेक्टर राज से अंग्रेज़ भी नहीं निबट पाए.
हिंदुस्तान के आज़ाद होने के बाद यह व्यवस्था और भी ज्यादा जटिल और दुरूह होती गई. जीएसटी के बाद भी अगर कर प्रावधान सरल नहीं हुआ तो व्यपारियों की परेशानी बढती जाएगी, उन्हें बाबुओं का डर भी सताएगा, जो भ्रष्ट व्यवस्था के सबसे बड़े पोषक हैं. 
अभी यह साफ़ नहीं है कि 1 जुलाई के बाद से राज्यों की टैक्स कलेक्शन में भूमिका क्या रहेगी, टैक्स कलेक्शन पर अमल कैसे होगा? अभी टैक्स इकठ्ठा करने के लिए राज्यों की कितनी ज्यादा भागीदारी होगी, यह तय होना है. जनता की मुश्किलें घटेंगी या बढेंगी यह देखना भी उतना ही दिलचस्प होगा.     
टैक्स स्लैब तय करने की खबर आने के बाद देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इस बात की चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या महंगा हुआ और क्या सस्ता, क्योंकि जनता को उम्मीद है कि जीएसटी आने के बाद उपभोक्ताओं को बहुत सी चीज़ें सस्ती मिलेंगी और मल्टिपल वैट और टैक्स से उनको हमेशा-हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी.
नए प्रावधानों के तहत, आम जनता को कुछ क्षेत्रों में राहत मिली है. फ़र्ज़ कीजिए अगर आप होटल में 1000 रूपये के कमरे में ठहरते हैं तो आपका टैक्स माफ़ है.
वित्त मंत्री अरुण जेटली आपकी सेहत का ख्याल तो रख ही रहे हैं साथ ही आपके पॉकेट की भी उनको फिकर है. वह चाहते हैं कि आप घर पर खाना बनाएं और खाएं. महंगे रेस्तरां में जायेंगे तो खर्च भी ज्यादा करना होगा.
1 जुलाई के बाद से राज्यों को और केंद्र को तभी फायदा है जब कर संग्रहण ज्यादा हो, कहीं ऐसा न ही कर संग्रह में पर्याप्त वृद्धि न हो.  
बाजार को जीएसटी से बड़ी उम्मीद है, इस वक़्त भारत की अर्थव्यवस्था 7 फीसद की दर से विकास रही है. शेयर मार्किट के जानकारों की राय है कि जीएसटी के आने के बाद जीडीपी में 2 फीसद का कम से कम इजाफा देखने को मिलेगा. सरकार को जीएसटी के आने से बड़ी कंपनियों को टैक्स के जाल में लाने में आसानी रहेगी.
कुछ आशंकाएं भी हैं, पंजाब जैसे बाज़ार में जहां ऑटो पार्ट्स का अच्छा खासा कारोबार है, व्यापारियों को आशंका है कि टैक्स के दरें 24 से 28 फीसद हो जाने से उनका ज्यादा नुकसान न हो जाए.
लुधियाना का साइकिल उद्योग भी सकते में है, पहले उन्हें 6 फीसद  टैक्स देना होता था, अब वह बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगा. प्लाईवुड को 28 प्रतिशत कर के स्लैब में रखा गया है इससे रियल एस्टेट पर बुरा असर पड़ेगा.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों कहा था कि हवाई सुविधा को आम लोगों के लिए सस्ती की जाएगी ताकि लुंगी और चप्पल पहनने वाला भी अपना यात्रा कर सकें. लेकिन अब तो हवाई यात्रा की सेवा दर 9 प्रतिशत से सीधा 15-18 प्रतिशत होने वाला है. 
जीएसटी का मकसद है भारत को एक साझा बाज़ार में तब्दील करना. मूल मुद्दा वही है कि क्या जीएसटी के आने से आपकी जेब पर कम बोझ पड़ेगा, आमदनी बढ़ जाएगी. अगर जवाब हां है तो हम सही रास्ते पर मिलकर आगे बढ़ें. जीएसटी से बहुत ज्यादा उम्मीद न पाल लें, इसे समय दें, कम से कम दो साल. यह कोई जिन्न नहीं है, जिसके आने भर से आपकी और हमारी साड़ी समस्याएं क्षण भर में काफूर हो जाएंगी.  



Thursday, May 18, 2017

आखिर क्या रहीं मोदी सरकार की 10 नाकामियां?


केंद्र की एनडीए सरकार अपनी जीत के तीन साल पूरे होने पर जश्न शुरु करे उससे पहले ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या वाकई पिछले तीन सालों में केंद्र सरकार जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाई  है?
ये सवाल न सिर्फ विकाश बल्कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी भी यही प्रश्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कर  रही है. कांग्रेस ने अपनी तरफ से मोदी की नाकामियों की एक ऐसी लिस्ट जारी की है...जिसको लेकर देश भर में बहस शुर हो गई हुई है...जब सीरीज के पहले हिस्से में जब हमने मोदी सरकार की 10 उपलब्धियां गिनवाई, उससे मोदी के विरोधी खासे नाराज़ हो गए...
लीजिए आज हम बता रहे हैं...आखिर केंद्र सरकार क्या वैसा नहीं कर पाई? आखिर क्या रहीं मोदी सरकार की 10 नाकामियां? आइये चर्चा करते हैं...बात intolerance की..
1.    सबसे पहले बात करते हैं intolerance की...पिछले तीन सालों में कई ऐसे मौके आए, जब JNU से लेकर देश के कई विश्वविद्यालयों में आन्दोलन खड़ा किया गया..कहा गया कि देश में बोलने की आजादी नहीं रही..कांग्रेस से लेकर दक्षिणपंथियों, लेफ्टिस्ट बुद्धिजीवियों ने मोदी की सरकार को कटघरे में खड़ा किया. रोहित वेमोला की मौत, बिहार के बबेगूसराय से आए कन्हैया कुमार का रातों रात हीरो बन जाना. जिसने भी केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाया, उसे देशद्रोही का दर्जा दे देना. लोकतंत्र में विमर्श की जगह है, होनी चाहिए.फिलहाल इस मुद्दे पर रसाकशी जारी है..
जारी है किसानों की आत्महत्या
2.    किसानों की आत्महत्या जारी है...क्या इस सरकार की प्राथमिकता की सूचि में किसानों के लिए कोई जगह है कहीं भी? किसान पहले भी ख़ुदकुशी कर रहे रहे थे, आज भी कर रहे हैं लेकिन अब उसकी चर्चा नहीं होती. अगर तमिलनाडु के किसान जंतर मंतर पर अपनी मांग उठाने के लिए विचित्र प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें पागल करार दिया जाता है. मोदी जी किसानों और खेतिहर मजदूरों की बात कब करेंगे..2022 तक मोदी जी किसानों की आय दुगुनी करने की बात कर रहे हैं..लेकिन किसानों की बेहतरी के लिए आपने क्या किया, मन की बात में इसकी चर्चा क्यों नहीं?

सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण क्यों?
3.    जब पिछले साल मोदी की सरकार ने एलओसी के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक किया, उसके बाद देश भर में तेज़ बहस शुरू हो गई कि सेना द्वारा किए गए स्ट्राइक का बीजेपी चुनावों में फायदा कैसे उठा सकती है..कांग्रेस ने कहा उनकी सरकार ने भी किया था सर्जिकल स्ट्राइक. इसमें नया क्या है. मुद्दा देश हित का था. सुरक्षा का था. अच्छा होता, इस पर न तो कांग्रेस, न ही बीजेपी राजनितिक बहस करती..हमारी सेना सियासत से परे है, उसे काम करने दें.

4.    हमारे जवान क्यों मारे जा रहे हैं?
विपक्ष का यह सवाल जायज़ है कि हमारे जवान पाकिस्तान के हाथों क्यों मारे जा रहे हैं? पाकिस्तान के सैनिक सीमा पार करके आते हैं और जवानों का सर कलम कर के ले जाते हैं...हमारे गृहमंत्री सिर्फ बदला लेने की बात करते हैं. सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा बेमानी है, जवानों की रोटी हुयी विधवाएं, उनके बच्चे, उनके बूढ़े पिता कब तक अपने आंसू रोक पाएंगे?
5.    कश्मीर के हालात बदतर क्यों हुए?
इस समय जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी की साझा सरकार है लेकिन वहां हालत बद से बदतर ही हुए हैं. वहां की ज़मीनी हकीक़त क्या है, सभी स्थिति से वाकिफ हैं... 1990 के दशक के बाद घाटी के हालत इतने बदतर कभी नहीं हुए थे. युवाओं में आक्रोश है, आतंकियों के जनाज़े में ज्यादा लोग शामिल होते हैं. आतंकियों की फंडिंग रुक नहीं रही है. हमारी सेना को निशाना बनाया जाता है. पालिसी पैरालिसिस की स्थिति है. कश्मीर को लेकर चिंता बढ़ रही है. जवाब उन नीति निर्माताओं को ही देना होगा..पत्थर के बदले पत्थर मरने से स्थिति नहीं बदलेगी..

देश में बढ़ा लाल आतंक..
6.    हमारे CRPF के जवान नाक्सली हमले में मारे जा रहे हैं, कई महीनों तक CRPF का शीर्ष पद खाली रहा. हमारा इंटेलिजेंस रेड कॉरिडोर में न के बराबर है. सुकमा में हमारे जवानों के साथ जो कुछ हुआ, उसने सुरक्षा के प्रति हमारी लचर तैयारियों को उजागर कर दिया है. इस विषय पर विमर्श ज़रूरी है. 
मोदी के पाकिस्तान प्रेम पर सवाल..
7.    पिछले साल काबुल से हिंदुस्तान आते हुए नरेन्द्र मोदी का जवाज़ अचानक लाहौर में उतर गया. मोदी नवाज़ शरीफ के यहाँ दावत खाने पाकिस्तान पहुँच गए..मोदी की जितनी सराहना हुयी...उससे ज्यादा अब आलोचना हो रही है..सवाल वहीँ खड़े हैं कि पाकिस्तान दौरे का हासिल क्या रहा? आज हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच कई अनसुलझे  मसले हैं, राजनयिक संबंध बाद से बदतर हुए हैं..
सवाल राष्ट्रवाद का
8.    आज देश में बहस इस बात पर होती है कि कौन राष्ट्रवादी और कौन राष्ट्रवादी नहीं है. देश के अन्दर लगता है सारी समस्याएं ख़त्म हो गई हैं. एक नई सियासत शुर हुई है, us-VS-THEM की.  गौ रक्षा के नाम पर राष्ट्रीयता की दुकान चल पड़ी है. इस पर विराम लगाना ज़रूरी है.
कहां गई नौकरी?
9.    हर साल करोड़ों लोगों को नौकरी मिलनी थी. क्या हुआ..डिजिटल इंडियन, स्किल इंडिया..मेक इन इंडिया..प्रधानमंत्री मोदी ने कितने नारे लगाए..देश को यह भी बता दीजिये कि तीन साल के बाद क्या नतीजे रहे..कितना निवेश हुआ..कितने बेरोजगारों को काम मिला? देश की जीडीपी कितनी पढ़ गई? देश ने कितनी तरक्की की..
  सूट बूट की सरकार और 15 लाख का सपना !
10.  देश में कालाधन लाने का क्या हुआ..लोगों के एकाउंट में 15-15 लाख जमा कराने की बात को अमित शाह पहले ही जुमला करार दे चुके हैं...नोटबंदी के बाद कितना काला धन सफ़ेद हुआ यह भी एक पहेली बन गई है...
वहीँ दुसरे तरफ आरोप हा कि यह सरकार किसके लिए है..१२१ करोड़ जनता के लिए या कॉर्पोरेट घरानों के लिए..सरकार की कॉर्पोरेट घरानों से नजदीकियां सवालों के घेरे में रही हैं. सरकार को अपनी छवि बदलने की ज़रूरत है.
लोग यह सवाल उठाने लगे हैं कि गरीब और मजदूर किसान...सरकार के राडार से गायब क्यों होते जा रहे हैं..? 
  

Tuesday, May 16, 2017

भ्रष्टाचार के आरोपों से कब तक आंख चुराएंगे केजरीवाल?

ब्रज मोहन सिंह
आम आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल कपिल मिश्रा के आरोपों को इसलिए दरकिनार
कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने एक ऐसे नेता के खिलाफ आरोप लगाए हैं, जो कभी अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन से जुड़े हुए थे, जो कभी भारतीय राजनीति में शुचिता का पर्याय बनने की कोशिश कर रहे थे, जो खुद को सबसे बड़ा ईमानदार नेता बता रहे थे.

courtesy:Indian Express

आम आदमी पार्टी के गठन के बाद केजरीवाल के साथ करने वालों दर्जनों विधायकों ने ऐसे-ऐसे कारनामें किए जो गैर कानूनी तो थे ही, साथ-साथ उन उसूलों के खिलाफ भी थे, जिसको केंद्र में रखकर दिल्ली की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया था.
दोष किसका है, अरविन्द केजरीवाल का, उनकी पार्टी का या दिल्ली के मतदाताओं का जिन्होंने इमानदारी पर आधारित एक आदर्श राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने का सुंदर सपना देखा. आप और हम कपिल मिश्रा के आरोपों को किस चश्मे से देखें?
मंत्री पद से हटाए जाने के बाद कपिल शर्मा ने केजरीवाल पर 2 करोड़ रूपये रिश्वत लेने का सनसनीखेज़ आरोप लगाया इस पूरे मामले पर केजरीवाल चुप रहे, मनीष सिसोदिया के अलावा और कोई कुछ नहीं बोला, अगले दिन संजय सिंह ने इसे बड़ा राष्ट्रीय स्तर का षड़यंत्र करार दिया.
अब आम आदमी पार्टी के चुनावी फंड पर बात कर लेते हैं, जिसको लेकर कपिल मिश्रा ने पूरी पार्टी को ही अपने लपेटे में ले लिया.
यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि आम आदमी पार्टी को चुनाव के दौरान बेहिसाब फंडिंग विदेशों से आई, जिसपर केंद्रीय एजेंसियों की नज़र तो थी ही. अब कपिल मिश्रा ने उन आरोपों के सबूत दुनिया के सामने रखे हैं. प्रथमदृष्टया, इन आरोपों को आधार बनाकर जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं.    

केजरीवाल पर आरोप है कि चुनाव आयोग को केजरीवाल ने फंडिंग के बारे में गलत जानकारी दी, यही नहीं इनकम टैक्स को भी कई बार गलत एंट्रीज़ भेजी गई. कपिल मिश्रा ने इन आंकड़ों का ज़ोरदार खुलासा किया है.

अभी फिलहाल न तो अरविन्द केजरीवाल और न ही उनकी पार्टी आरोपों की गंभीरता पर विचार कर रही है या किसी तरह का कदम उठा रही है. समस्या है कि चुनावी फंडिंग के फंदे में फंसे केजरीवाल मामले को सतही तौर निबटाना चाहती है.
अगर दो करोड़ के रिश्वत के आरोपों को फिलहाल किनारे भी कर दें तो पारिवारिक रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने का आरोप गंभीर है, जिसपर केजरीवाल को फ़ौरन जवाब देना ही चाहिए था. लेकिन हुआ इसके उलट अरविन्द केजरीवाल की जगह उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने मोर्चा  संभाल लिया है और उनका कपिल मिश्रा के खिलाफ ट्विटर वार काफी दिलचस्प मुकाबले में तब्दील होता जा रहा है.
अरविन्द के केजरीवाल के साढू सुरिंदर बंसल आज जिंदा नहीं रहे लेकिन उन आरोपों को देखना ज़रूरी है.
जिस दिन कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर आरोप लगाये, उस्सी दिन सुरिंदर बंसल का निधन हुआ लेकिन जब कपिल ने केजरीवाल को घेरने की कोशिश की तो सुनीता केजरीवाल ने कपिल के लिए कहा कि ये स्टूपिड आदमी मेरे ब्रदर-इन-लॉ पर आरोप लगा रहा हैजिनका निधन हो गया है.
इस पूरे मामले पर मनीष सिसोदिया का आरोप भी चौंकाने वाला ही था, जिन्होंने कहा कि अभी चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई है कपिल ऐसे ऐसे आरोप लगा रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बंसल ने रेणु कंस्ट्रक्शन के नाम से एक कंपनी बनाई तो थी लेकिन पीडब्लूडी ने उसको क्लीन चित देने से मन कर दिया, लेकिन रुतबे का इस्तेमाल कर बंसल को काम मिलता रहा.  बंसल के ऊपर फर्जी बिलों को सही बनवाने में भी उसकी भूमिका रही है, इसे कई बार कपिल मिश्र धोरा चुके हैं. कपिल मिश्र ने यह दावा किया था कि इस बात की जानकारी उन्हें सतेयेंद्र जैन ने दी थी.

इस कहानी में कई पेंच भी है, अब कई लोग बंसल की मौत पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अचानक उनकी मौत कैसे हो गयी, कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं? हालाँकि अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से इस तरह के कोई सवाल नहीं उठाए गए हैं. कपिल मिश्रा आईएसआई का एजेंट हो या बीजेपी का, केजरीवाल पर लगाए गए आरोप गंभीर किस्म के हैं, इसको हल्के में नहीं टाला जा सकता है.  


Saturday, May 13, 2017

ईवीएम का बहाना छोड़ें केजरीवाल, यह बताएं कि उनकी नैया डूब क्यों रही है?

त्वरित टिप्पणी
ब्रज मोहन सिंह 
हार के बाद पार्टी के अन्दर आत्म विश्लेषण होता है लेकिन आम आदमी पार्टी हार-दर-हार के बाद भी इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि उनकी रणनीति में कहीं गलती भी है। “आप’ के अन्दर  दरअसल मंथन पंजाब चुनाव के नतीजे के बाद ही शुरू हो जाना चाहिए था कि आखिर ऐन वक़्त पर पंजाब की जनता ने अपना मूड क्यों बदल लिया और कांग्रेस को भारी बहुमत से क्यों जिताया? शायद पंजाब के स्थानीय नेताओं से अब तक हार का फीडबैक लिया ही नहीं गया।

आगे बढ़ते हैं, पंजाब चुनाव के बाद बहुत अच्छा मौका था जब दिल्ली गुरुद्वारा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए  कम से कम अकाली दल को बाहर करने का अच्छा मौका था, लेकिन दिल्ली में भी पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को मुंह की खानी पड़ी।राजौरी गार्डन विधान सभा उप चुनाव में तो आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर आई,  फिर भी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अपने अन्दर झांक कर देखने की जुर्रत नहीं की।और अब एमसीडी चुनाव के नतीजे, जिसके बारे में आम आदमी पार्टी ने पहले से ही प्रचारित कर रखा था कि वह चुनाव हारने जा रही है। यह हारने वाली मानसिकता कतई ठीक नहीं है।

आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने खुलकर पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।भगवंत मान ने कहा है की उनकी 'पार्टी एक मोहल्ला क्रिकेट टीम की तरह व्यवहार कर रही है। आप ने पंजाब में जो ऐतिहासिक भूल की उसकी अभी तक समीक्षा नहीं की।मान ने ईवीएम में गड़बड़ी पर तो केजरीवाल का बचाव किया है लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी निशाने पर लिया है।मान ने कहा है कि 'ईवीएम में गलती ढूंढने का कोई मतलब यह नहीं कि पार्टी अपनी कमियां को न देखे। अभी आम आदमी पार्टी का चुनाव इतिहास महज कुछ सालों का है। आम आदमी पार्टी के लिए यह सीखने का वक़्त है, संभलने का वक़्त है, और संभलकर वार करने का वक़्त है। 

अगर आम आदमी पार्टी की सुई ईवीएम मशीन पर अटकी रही तो  जनता आम आदमी पार्टी को पूरी तरह से नकार देगी। फैसला केजरीवाल को करना है कि बचे हुए तीन सालों में दिल्ली में ब्लेम-गेम की सियासत करेगी या जनता का विश्वास जीतने का प्रयास करेगी। 
courtesy:http://www.dainiksaveratimes.com/news/kejriwal-should-leave-the-pretense-of-evm-see-why-he-is-drowning-hindi-news-89015


मोदी को 2019 में हराया भी जा सकता है, कारण जानना ज़रूरी है

      मोदी की लोकप्रियता में एक साल में कमी आई है , इस सवाल का जवाब न तो पहले आसान था न ही आज आसान है। अगर चुनाव...