केंद्र की एनडीए सरकार अपनी जीत के तीन साल पूरे होने
पर जश्न शुरु करे उससे पहले ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या वाकई पिछले तीन
सालों में केंद्र सरकार जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाई है?
ये सवाल न सिर्फ विकाश बल्कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी भी
यही प्रश्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कर
रही है. कांग्रेस ने अपनी तरफ से मोदी की नाकामियों की एक ऐसी लिस्ट जारी
की है...जिसको लेकर देश भर में बहस शुर हो गई हुई है...जब सीरीज के पहले हिस्से
में जब हमने मोदी सरकार की 10 उपलब्धियां गिनवाई, उससे मोदी के विरोधी खासे नाराज़
हो गए...
लीजिए आज हम बता रहे हैं...आखिर केंद्र सरकार क्या वैसा
नहीं कर पाई? आखिर क्या रहीं मोदी सरकार की 10 नाकामियां? आइये चर्चा करते हैं...बात intolerance की..
1.
सबसे पहले बात करते हैं
intolerance की...पिछले तीन सालों में कई ऐसे मौके आए, जब JNU से लेकर देश के कई
विश्वविद्यालयों में आन्दोलन खड़ा किया गया..कहा गया कि देश में बोलने की आजादी
नहीं रही..कांग्रेस से लेकर दक्षिणपंथियों, लेफ्टिस्ट बुद्धिजीवियों ने मोदी की
सरकार को कटघरे में खड़ा किया. रोहित वेमोला की मौत, बिहार के बबेगूसराय से आए
कन्हैया कुमार का रातों रात हीरो बन जाना. जिसने भी केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल
उठाया, उसे देशद्रोही का दर्जा दे देना. लोकतंत्र में विमर्श की जगह है, होनी
चाहिए.फिलहाल इस मुद्दे पर रसाकशी जारी है..
जारी
है किसानों की आत्महत्या
2.
किसानों की आत्महत्या जारी है...क्या
इस सरकार की प्राथमिकता की सूचि में किसानों के लिए कोई जगह है कहीं भी? किसान
पहले भी ख़ुदकुशी कर रहे रहे थे, आज भी कर रहे हैं लेकिन अब उसकी चर्चा नहीं होती.
अगर तमिलनाडु के किसान जंतर मंतर पर अपनी मांग उठाने के लिए विचित्र प्रदर्शन करते
हैं तो उन्हें पागल करार दिया जाता है. मोदी जी किसानों और खेतिहर मजदूरों की बात
कब करेंगे..2022 तक मोदी जी किसानों की आय दुगुनी करने की बात कर रहे हैं..लेकिन
किसानों की बेहतरी के लिए आपने क्या किया, मन की बात में इसकी चर्चा क्यों नहीं?
सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण क्यों?
3.
जब पिछले साल मोदी की सरकार
ने एलओसी के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक किया, उसके बाद देश भर में तेज़ बहस शुरू हो
गई कि सेना द्वारा किए गए स्ट्राइक का बीजेपी चुनावों में फायदा कैसे उठा सकती
है..कांग्रेस ने कहा उनकी सरकार ने भी किया था सर्जिकल स्ट्राइक. इसमें नया क्या
है. मुद्दा देश हित का था. सुरक्षा का था. अच्छा होता, इस पर न तो कांग्रेस, न ही
बीजेपी राजनितिक बहस करती..हमारी सेना सियासत से परे है, उसे काम करने दें.
4.
हमारे जवान क्यों मारे जा रहे
हैं?
विपक्ष का यह सवाल जायज़ है
कि हमारे जवान पाकिस्तान के हाथों क्यों मारे जा रहे हैं? पाकिस्तान के सैनिक सीमा
पार करके आते हैं और जवानों का सर कलम कर के ले जाते हैं...हमारे गृहमंत्री सिर्फ
बदला लेने की बात करते हैं. सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा बेमानी है, जवानों की रोटी
हुयी विधवाएं, उनके बच्चे, उनके बूढ़े पिता कब तक अपने आंसू रोक पाएंगे?
5. कश्मीर के हालात बदतर क्यों
हुए?
इस
समय जम्मू कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी की साझा सरकार है लेकिन वहां हालत बद से बदतर
ही हुए हैं. वहां की ज़मीनी हकीक़त क्या है, सभी स्थिति से वाकिफ हैं... 1990 के दशक
के बाद घाटी के हालत इतने बदतर कभी नहीं हुए थे. युवाओं में आक्रोश है, आतंकियों
के जनाज़े में ज्यादा लोग शामिल होते हैं. आतंकियों की फंडिंग रुक नहीं रही है.
हमारी सेना को निशाना बनाया जाता है. पालिसी पैरालिसिस की स्थिति है. कश्मीर को
लेकर चिंता बढ़ रही है. जवाब उन नीति निर्माताओं को ही देना होगा..पत्थर के बदले
पत्थर मरने से स्थिति नहीं बदलेगी..
देश में बढ़ा लाल आतंक..
6.
हमारे CRPF के जवान नाक्सली
हमले में मारे जा रहे हैं, कई महीनों तक CRPF का शीर्ष पद खाली रहा. हमारा
इंटेलिजेंस रेड कॉरिडोर में न के बराबर है. सुकमा में हमारे जवानों के साथ जो कुछ
हुआ, उसने सुरक्षा के प्रति हमारी लचर तैयारियों को उजागर कर दिया है. इस विषय पर
विमर्श ज़रूरी है.
मोदी के पाकिस्तान प्रेम पर
सवाल..
7.
पिछले साल काबुल से
हिंदुस्तान आते हुए नरेन्द्र मोदी का जवाज़ अचानक लाहौर में उतर गया. मोदी नवाज़
शरीफ के यहाँ दावत खाने पाकिस्तान पहुँच गए..मोदी की जितनी सराहना हुयी...उससे
ज्यादा अब आलोचना हो रही है..सवाल वहीँ खड़े हैं कि पाकिस्तान दौरे का हासिल क्या
रहा? आज हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच कई अनसुलझे मसले हैं, राजनयिक संबंध बाद से बदतर हुए हैं..
सवाल राष्ट्रवाद का
8.
आज देश में बहस इस बात पर
होती है कि कौन राष्ट्रवादी और कौन राष्ट्रवादी नहीं है. देश के अन्दर लगता है
सारी समस्याएं ख़त्म हो गई हैं. एक नई सियासत शुर हुई है, us-VS-THEM की. गौ रक्षा के नाम पर राष्ट्रीयता की दुकान चल पड़ी
है. इस पर विराम लगाना ज़रूरी है.
कहां गई नौकरी?
9.
हर साल करोड़ों लोगों को
नौकरी मिलनी थी. क्या हुआ..डिजिटल इंडियन, स्किल इंडिया..मेक इन
इंडिया..प्रधानमंत्री मोदी ने कितने नारे लगाए..देश को यह भी बता दीजिये कि तीन
साल के बाद क्या नतीजे रहे..कितना निवेश हुआ..कितने बेरोजगारों को काम मिला? देश
की जीडीपी कितनी पढ़ गई? देश ने कितनी तरक्की की..
सूट
बूट की सरकार और 15 लाख का सपना !
10. देश
में कालाधन लाने का क्या हुआ..लोगों के एकाउंट में 15-15 लाख जमा कराने की बात को
अमित शाह पहले ही जुमला करार दे चुके हैं...नोटबंदी के बाद कितना काला धन सफ़ेद हुआ
यह भी एक पहेली बन गई है...
वहीँ
दुसरे तरफ आरोप हा कि यह सरकार किसके लिए है..१२१ करोड़ जनता के लिए या कॉर्पोरेट
घरानों के लिए..सरकार की कॉर्पोरेट घरानों से नजदीकियां सवालों के घेरे में रही
हैं. सरकार को अपनी छवि बदलने की ज़रूरत है.
लोग
यह सवाल उठाने लगे हैं कि गरीब और मजदूर किसान...सरकार के राडार से गायब क्यों
होते जा रहे हैं..?
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