ब्रज
मोहन सिंह
आम
आदमी पार्टी और अरविन्द केजरीवाल कपिल मिश्रा के आरोपों को इसलिए दरकिनार
कर
रहे हैं क्योंकि उन्होंने एक ऐसे नेता के खिलाफ आरोप लगाए हैं, जो कभी अन्ना हजारे के
भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन से जुड़े हुए थे, जो कभी भारतीय
राजनीति में शुचिता का पर्याय बनने की कोशिश कर रहे थे, जो
खुद को सबसे बड़ा ईमानदार नेता बता रहे थे.
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courtesy:Indian Express |
आम
आदमी पार्टी के गठन के बाद केजरीवाल के साथ करने वालों दर्जनों विधायकों ने
ऐसे-ऐसे कारनामें किए जो गैर कानूनी तो थे ही, साथ-साथ उन उसूलों के खिलाफ भी
थे, जिसको केंद्र में रखकर दिल्ली की जनता ने उन्हें पूर्ण
बहुमत दिया था.
दोष
किसका है, अरविन्द
केजरीवाल का, उनकी पार्टी का या दिल्ली के मतदाताओं का
जिन्होंने इमानदारी पर आधारित एक आदर्श राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने का सुंदर
सपना देखा. आप और हम कपिल मिश्रा के आरोपों को किस चश्मे से देखें?
मंत्री
पद से हटाए जाने के बाद कपिल शर्मा ने केजरीवाल पर 2 करोड़ रूपये रिश्वत लेने का
सनसनीखेज़ आरोप लगाया इस पूरे मामले पर केजरीवाल चुप रहे, मनीष सिसोदिया के अलावा और कोई
कुछ नहीं बोला, अगले दिन संजय सिंह ने इसे बड़ा राष्ट्रीय
स्तर का षड़यंत्र करार दिया.
अब आम
आदमी पार्टी के चुनावी फंड पर बात कर लेते हैं, जिसको लेकर कपिल मिश्रा ने पूरी
पार्टी को ही अपने लपेटे में ले लिया.
यह
खबर इसलिए अहम है क्योंकि आम आदमी पार्टी को चुनाव के दौरान बेहिसाब फंडिंग
विदेशों से आई, जिसपर
केंद्रीय एजेंसियों की नज़र तो थी ही. अब कपिल मिश्रा ने उन आरोपों के सबूत दुनिया
के सामने रखे हैं. प्रथमदृष्टया, इन आरोपों को आधार बनाकर जांच
शुरू करने के लिए पर्याप्त तथ्य मौजूद हैं.
केजरीवाल
पर आरोप है कि चुनाव आयोग को केजरीवाल ने फंडिंग के बारे में गलत जानकारी दी, यही नहीं इनकम टैक्स को भी कई
बार गलत एंट्रीज़ भेजी गई. कपिल मिश्रा ने इन आंकड़ों का ज़ोरदार खुलासा किया है.
अभी
फिलहाल न तो अरविन्द केजरीवाल और न ही उनकी पार्टी आरोपों की गंभीरता पर विचार कर
रही है या किसी तरह का कदम उठा रही है. समस्या है कि चुनावी फंडिंग के फंदे में
फंसे केजरीवाल मामले को सतही तौर निबटाना चाहती है.
अगर
दो करोड़ के रिश्वत के आरोपों को फिलहाल किनारे भी कर दें तो पारिवारिक रिश्तेदारों
को फायदा पहुंचाने का आरोप गंभीर है, जिसपर केजरीवाल को फ़ौरन जवाब देना ही चाहिए था.
लेकिन हुआ इसके उलट अरविन्द केजरीवाल की जगह उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने मोर्चा
संभाल लिया है और उनका कपिल मिश्रा के
खिलाफ ट्विटर वार काफी दिलचस्प मुकाबले में तब्दील होता जा रहा है.
अरविन्द
के केजरीवाल के साढू सुरिंदर बंसल आज जिंदा नहीं रहे लेकिन उन आरोपों को देखना
ज़रूरी है.
जिस
दिन कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर आरोप लगाये, उस्सी दिन सुरिंदर बंसल का निधन हुआ लेकिन जब कपिल
ने केजरीवाल को घेरने की कोशिश की तो सुनीता केजरीवाल ने कपिल के लिए कहा कि ‘ये स्टूपिड आदमी मेरे
ब्रदर-इन-लॉ पर आरोप लगा रहा है, जिनका निधन हो गया है.’
इस पूरे मामले पर मनीष सिसोदिया का आरोप भी चौंकाने वाला ही था, जिन्होंने कहा कि “ अभी चिता की आग भी ठंडी
नहीं हुई है कपिल ऐसे ऐसे आरोप लगा रहे हैं.”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बंसल ने रेणु कंस्ट्रक्शन के नाम से
एक कंपनी बनाई तो थी लेकिन पीडब्लूडी ने उसको क्लीन चित देने से मन कर दिया, लेकिन रुतबे का
इस्तेमाल कर बंसल को काम मिलता रहा. बंसल के ऊपर फर्जी बिलों को सही बनवाने
में भी उसकी भूमिका रही है, इसे कई बार कपिल मिश्र धोरा चुके हैं. कपिल
मिश्र ने यह दावा किया था कि इस बात की जानकारी उन्हें सतेयेंद्र जैन ने दी थी.
इस
कहानी में कई पेंच भी है, अब कई लोग बंसल की मौत पर भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर अचानक उनकी मौत
कैसे हो गयी, कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं? हालाँकि अभी तक दिल्ली पुलिस की तरफ से इस तरह के कोई सवाल नहीं उठाए गए
हैं. कपिल मिश्रा आईएसआई का एजेंट हो या बीजेपी का, केजरीवाल
पर लगाए गए आरोप गंभीर किस्म के हैं, इसको हल्के में नहीं
टाला जा सकता है.


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